Volume : 5, Issue : 7, JUL 2019

" श्रीरामरसायनम् " काव्य की रामकथात्मक काव्यों से तुलना (" SHREERAAMARASAAYANAM " KAAVY KEE RAAMAKATHAATMAK KAAVYON SE TULANA)

Dr. Ruchi Sharma

Abstract

भारतीय संस्कृत वाङ्मय में रामकथात्मक काव्यों का ववशेष योगदान रहा है। रामकथात्मक काव्यों की श्ृंखऱा में श्ी ऱक्ष्मण ससंह अग्रवाऱ कृत श्ीरामरसायनम् काव्य का भी सवोकृष्ट स्थान है। यह ग्रन्थ सात संगो में उऩननबद्ध एक श्ेष्ठ रामकाव्य है। इस काव्य में श्ी रामथा को अत्यन्त सूक्ष्म रूऩ में वर्णित ककया गया है। प्रस्तुत शोध ऩत्र में 'श्ीरामरसायनम्' काव्य की अधतननया रामकथात्मक काव्यों से तुऱना काव्यशास्त्रीय ससद्धान्तों के आधार ऩर करना अऩेक्षऺत है। इसके अन्तगित भावऩऺ एवं कऱाऩऺीय तत्व के रूऩ में ववधमान क्रमशः रस, ध्वनन, छन्द, अऱंकार, शैऱी, गुण, रीनत आदी के आधार ऩर उक्त काव्य की रामकथात्मक काव्यों से तुऱना को प्रदसशित ककया गया है।

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