Volume : 5, Issue : 7, JUL 2019

तुलसीदास का रामभक्ति साहित्य: सामाजिक और मानवतावादी दृष्टिकोण (‘RAMBHAKTI LITERATURE OF TULSIDAS: SOCIAL AND HUMANISTIC PERSPECTIVES’)

DR. SANJEEV KUMAR

Abstract

गोस्वामी तुलसी दास हिन्दी रामभक्ति काव्यधारा के उन श्रेष्ठ कवियों में से हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति में श्रेष्ठ तत्वों को समाहित कर उसे जन-जन के लिए प्Çोरणा का अक्षय स्रोत बना दिया । भक्तिकाल के कवियों में तुलसीदास का स्थान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। तुलसी का काव्य आत्मसम्मान, प्Çोम, संघर्ष तथा आत्मविश्वास का काव्य है। उनका काव्य परम्परावादी लोगों के लिए जितना मनोहर है उतना ही शिक्षित-अशिक्षित तथा साधारण पाठकों को भी पि्Çाय है। तुलसी की लोकपि्Çायता का आधार भक्ति मात्र नहीं है बल्कि लोकजीवन का व्यापक चित्रण है जिसमें गरीबी, अकाल, नारी समस्या, संत-असंत तथा दैहिक, दैविक व भौतिक ताप का वर्णन उन्होंने विशेष रूप से किया है। इस बात का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हिन्दी साहित्य का सर्वमान्य एवं सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य 'रामचरितमानस' मानव संसार के साहित्य के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथों और महाकाव्यों में से एक है और रामचरितमानस की प्Çाति किसी न किसी रूप में लगभग भारत के प्Çात्येक घर में विद्यमान मिलती है। विश्व के सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य ग्रंथ के साथ रामचरितमानस को ही प्Çातिष्ठित करना समीचीन प्Çातीत होता है। प्Çासाद जी लऱखते हैं ः-

राम छोड़कर और की, जिसने कभी न आस की,

रामचरितमानस-कमल, जय हो तुलसीदास की।

Keywords

तुलसीदास, रामभक्ति साहित्य, सामाजिक और मानवतावादी दृष्टिकोण

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References

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