Volume : 5, Issue : 7, JUL 2019

भारतीय सिनेमा तथा नारी: इतिहास व वर्तमान संदर्भ (‘INDIAN CINEMA AND WOMEN: HISTORY AND CURRENT REFERENCE’)

DR. SANJEEV KUMAR

Abstract

आदिकाल से ही मानव ने नारी शक्ति की पूजा की है। पुरूष एक ओर जहाँ कठोरता, शक्ति एवं शौर्य तथा सक्रियता का परिचायक है वहीं नारी कोमलता, मधुरता एवं सगुण का मूर्तरूप है। विश्व का सबसे पहला (लगभग २५०० वर्ष पहले) समाजशास्त्र, मनुस्मृति के अनुसार "यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमते तत्र देवता।" यह विचारधारा नारी की श्रेष्ठता की द्योतक है। यह स्पष्ट है कि जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवता निवास करते हैं, वहाँ सुख, समृद्धि और सद्गुणों का विकास होता है, और जहाँ स्त्री का सम्मान नहीं होता वहाँ तमाम श्रेष्ठ क्रियाएùं भी निष्फल होती हैं। देवता, किन्नर और गंधर्व इत्यादि भी नारी को शक्ति का पर्याय ही मानते आए हैं। नारी मातृ शक्ति के रूप में पूज्नीय रही है । गौरी के रूप में आदर्श पतिव्Çाता तथा सौंदर्य की देवी की भी कल्पना की गई है।

Keywords

भारतीय सिनेमा, नारी, इतिहास व वर्तमान

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References

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