Volume : 5, Issue : 7, JUL 2019

बाजारवाद का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव (EFFECTS OF MARKETISM ON HINDI LITERATURE.)

DR. SANJEEV KUMAR

Abstract

साहित्य का अर्थ - किसी भाषा के वाचिक और लखिति (शास्त्रसमूह) को साहित्य कह सकते हैं। अन्य अर्थों में 'सहित' या 'साथ' होने की अवस्था। गद्य एवं पद्य की वे समस्त पुस्तकें जिनमें नैतिक सत्य और मानवभाव, बुद्धिमत्ता तथा व्यापकता से प्Çाकट किए गए हों। साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है। एक साहित्यकार समाज की वास्तविक तस्वीर को सदैव अपने साहित्य में उतारता रहा है। मानव जीवन समाज का ही एक अंग है। मनुष्य परस्पर मिलकर समाज की रचना करते हैं। दूसरों शब्दों में, किसी भी काल के साहित्य के अध्ययन से हम तत्कालीन मानव जीवन के रहन-सहन व अन्य गतिविधियों का सहज ही अध्ययन कर सकते हैं या उसके विषय में सम्पूर्ण जानकारी प्Çाप्त कर सकते हैं। एक अच्छा साहित्य मानव जीवन के उत्थान व चारित्रिक विकास में सदैव सहायक होता है।

Keywords

बाजारवाद, हिन्दी साहित्य, प्Çाभाव

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References

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